कानपुर में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, ट्रस्ट के बैंक खाते से दो साल में 36 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन

1000268983

Major cyber fraud case uncovered in Kanpur

कानपुर गोवंश संरक्षण के नाम पर ट्रस्ट बनाकर देशभर में साइबर ठगी की रकम मंगवाने वाले गिरोह का फीलखाना थाना पुलिस और साइबर क्राइम टीम ने राजफाश कर एक्सिस बैंक के एक कर्मचारी समेत दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

जांच में ट्रस्ट के खाते से पिछले दो साल में करीब 36 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है। एनसीआरपी (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर इस खाते के खिलाफ विभिन्न राज्यों से 178 शिकायतें दर्ज मिली हैं। खाते में लेनदेन का स्तर इतना अधिक था कि मात्र सात दिन का बैंक स्टेटमेंट 5766 पेज का निकला।

डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि फतेहपुर के ललौली सुदीन का डेरा पोस्ट कारन निवासी और वर्तमान में सनिगवां में रहने वाले सूरज निषाद ने अपनी पत्नी के साथ दो साल पहले 'गोमाता गोरक्षा सेवा मंच' नाम से ट्रस्ट बनाया था। ट्रस्ट का बैंक खाता माल रोड स्थित एक्सिस बैंक में खाते खुलवाने का काम करने वाले बिठूर के टिकरा लोहारखेड़ा निवासी विक्रम कुमार ने खुलवाया गया।

इसके बाद सूरज ने यह खाता विक्रम और उसके साथी रोहित मल्होत्रा को किराये पर दे दिया। इसी खाते में डिजिटल अरेस्ट और अन्य साइबर अपराधों से ठगी गई रकम देशभर से मंगाई जाती थी। साइबर सेल को एनसीआरपी पोर्टल पर एक्सिस बैंक के इस खाते से संबंधित लगातार शिकायतें मिल रही थीं।

एडीसीपी पूर्वी शिवा सिंह ने बताया कि जांच में पता चला कि इस खाते से जुड़े 178 साइबर ठगी के मामले दर्ज हैं और करीब 36 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। पुलिस ने सूरज निषाद और विक्रम कुमार को चार्लिस चौराहा फूलबाग बस स्टैंड के पास से गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में सामने आया कि खाते में आने वाली ठगी की रकम का तय प्रतिशत सूरज और विक्रम को मिलता था। एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर ट्रस्ट के एक्सिस बैंक खाते में लगभग सात करोड़ रुपये पहले ही होल्ड किए जा चुके हैं।

विक्रम कुमार के पास से 15 नए ग्राहकों की बैंक किट, चेकबुक, पासबुक, ऋण प्रपत्र तथा अन्य बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस को एक्सिस बैंक, फिनो पेमेंट बैंक समेत विभिन्न बैंकों के चार अन्य खाते भी मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

बैंक खाते के लेनदेन की गहन जांच के दौरान सिर्फ सात दिन का बैंक स्टेटमेंट निकलवाया गया, जो 5766 पेज का था। इससे खाते में प्रतिदिन बड़ी धनराशि का लेनदेन होता था। साइबर टीम अब पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच कर रही है।
- सत्यजीत गुप्ता, डीसीपी पूर्वी

पूर्व विधायक को पार्षद और पार्षद पति को पार्षद बताया

तलाशी के दौरान पुलिस को आरोपितों के कब्जे से कई दस्तावेज भी मिले। इनमें कल्याणपुर से पूर्व विधायक सतीश निगम के नाम की मुहर मिली, जिसमें उनके नाम के आगे पार्षद अंकित था।

वार्ड 19 कल्याणपुर दक्षिण की पार्षद ज्योति पासवान के पति दिनेश पासवान के नाम की मुहर और लेटरपैड मिले, जिसमें दिनेश पासवान को पार्षद बताया गया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इनका इस्तेमाल बैंक लोन और अन्य दस्तावेजों के सत्यापन के लिए फर्जी कागजात तैयार करने में किया जाता था।

विक्रम नेटवर्क का हैंडलर

डीसीपी पूर्वी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपित साइबर अपराधियों को म्यूल खाते उपलब्ध कराने का काम करते थे। विक्रम इस नेटवर्क का हैंडलर था, वहीं गिरोह के अन्य सदस्य अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए साइबर क्राइम और फीलखाना पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क के जरिए देशभर में कितने साइबर गिरोहों को बैंक खाते उपलब्ध कराए गए और इसमें अन्य बैंक कर्मियों की भूमिका तो नहीं है।